( Mr ds news) गरियाबंद:_ जंगल, वन्यजीव और प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वन विभाग के वीर शहीदों की स्मृति में 11 सितंबर को शहीद स्मारक दिवस मनाया गया। गरियाबंद वन विभाग परिसर स्थित शहीद स्मारक में आयोजित कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन कर उनके बलिदान को याद किया।
कार्यक्रम की शुरुआत शहीद स्मारक पर पूजा-अर्चना और श्रद्धांजलि के साथ हुई। वर्दीधारी जवानों और वन विभाग के कर्मचारियों ने वीर शहीदों को सलामी देकर उनके अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा को स्मरण किया। इस दौरान शहीद परिवार का सम्मान भी किया गया।
नक्सलियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे मधुसूदन पाटिल
वन विभाग के शहीद मधुसूदन पाटिल वनपाल के रूप में वन परिक्षेत्र नवागढ़ में सहायक परिक्षेत्र अधिकारी, दर्रीपारा के पद पर पदस्थ थे। घने जंगलों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने नक्सलियों की हिंसक वारदात का सामना किया।
कर्तव्य निर्वहन के दौरान 21 मार्च 2011 को नक्सलियों के हाथों वे वीरगति को प्राप्त हुए। वन सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और साहस आज भी विभाग के कर्मचारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
मुख्यमंत्री के हाथों भी मिला सम्मान
शहीद मधुसूदन पाटिल के बलिदान को सम्मान देते हुए छत्तीसगढ़ शासन की ओर से उनके नाम पर प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। रायपुर के दीनदयाल ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा यह सम्मान प्रदान किया गया।
बलिदान को याद करने का दिन
शहीद स्मारक दिवस महज एक आयोजन नहीं, बल्कि उन तमाम वनकर्मियों के बलिदान को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने विपरीत और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में जंगल, वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा को अपना कर्तव्य माना। गरियाबंद में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम ने वन विभाग के इन वीर शहीदों की शौर्यगाथा और कर्तव्यनिष्ठा को एक बार फिर याद किया।
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