रविवार सुबह पुलिया बहने की सूचना मिलते ही दोनों ओर वाहनों और राहगीरों की लंबी कतार लग गई। ग्रामीणों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जबकि कई लोगों को मजबूरन वैकल्पिक और लंबी दूरी वाले मार्गों का सहारा लेना पड़ा।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया का निर्माण गुणवत्ताहीन तरीके से किया गया था। उनका कहना है कि वर्षों की मांग के बाद पुलिया का निर्माण हुआ, लेकिन पहली ही तेज बारिश में इसके बह जाने से संबंधित विभाग और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों ने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से मौसम में लगातार बदलाव के बाद किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार था। बारिश से खेती-किसानी के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं और किसान अब खरीफ फसलों की बुवाई में जुट सकेंगे। हालांकि, पुलिया बहने से ग्रामीणों की खुशियों पर पानी फिर गया है और दैनिक आवागमन तथा आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सारागांव मार्ग की इस पुलिया में हर वर्ष बारिश के दौरान समस्या उत्पन्न होती है, लेकिन इसे स्थायी समाधान के तहत बड़े पुल में तब्दील करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने तथा स्थायी पुल निर्माण की मांग की है, ताकि बरसात के शेष दिनों में ग्रामीणों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
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