जिला मुख्यालय के सबसे व्यस्त मार्ग पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। दोपहिया वाहन चालक सावधानी से पानी के बीच रास्ता तलाशते रहे, जबकि चारपहिया वाहन भी धीमी गति से गुजरने को मजबूर दिखे। व्यापारियों और राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
14 साल बाद भी वही सवाल
गरियाबंद को जिला बने लगभग 14 वर्ष हो चुके हैं। इस दौरान विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई घोषणाएं हुईं, लेकिन हर बारिश के साथ जलभराव की समस्या फिर सामने आ जाती है। इससे शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।
दावे बनाम हकीकत
बारिश से पहले नालों की सफाई और जलभराव रोकने के दावे हर साल किए जाते हैं। लेकिन बारिश के बाद सड़कों पर भरे पानी की तस्वीरें इन तैयारियों की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है।
सबसे बड़ा सवाल
जब राष्ट्रीय राजमार्ग जैसी महत्वपूर्ण सड़क पर जलभराव की स्थिति बन जाती है, तो शहर की अंदरूनी सड़कों और मोहल्लों की स्थिति कैसी होगी? यही सवाल अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय है।
जनता की अपेक्षा
नागरिक चाहते हैं कि नगर पालिका और जिला प्रशासन जल निकासी व्यवस्था को स्थायी रूप से बेहतर बनाने, सड़कों की गुणवत्ता सुधारने और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि हर बारिश में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
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