सैकड़ों ट्रकों का बोझ, बदहाल सड़क... ग्रामीणों ने विधायक से लगाई गुहार


गरियाबंद/ फिंगेश्वर:_ कुंडेल धान संग्रहण केंद्र से होकर गांव सिर्रीखुर्द, खुटेरी, बिजली, मड़वाडीह होते हुए पुरेना मोड़ चौक तक जाने वाला मार्ग इन दिनों अत्यंत जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। इस सड़क से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में भारी वाहन और ट्रक गुजरते हैं, जिसके कारण ग्रामीणों के आवागमन के लिए बनी यह सड़क लगातार खराब होती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि धान परिवहन के दौरान भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे राहगीरों, किसानों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 

बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, तथा दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक रोहित साहू से इस मार्ग के शीघ्र निर्माण और मरम्मत की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि विधायक द्वारा क्षेत्र में कई सड़कों का निर्माण एवं उन्नयन कार्य कराया जा रहा है, कई सड़कें निर्माणाधीन हैं तथा कई परियोजनाओं को स्वीकृति भी मिल चुकी है। इसी क्रम में इस महत्वपूर्ण मार्ग को भी प्राथमिकता दिए जाने की अपेक्षा की जा रही है।

इस संबंध में विधायक प्रतिनिधि ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए संबंधित मंत्री को प्रस्ताव एवं जानकारी भेजी जा चुकी है और उम्मीद है कि जल्द ही इस सड़क के कायाकल्प का कार्य भी शुरू होगा। ग्रामीणों की मांग है कि क्षेत्र के विकास की रफ्तार के साथ इस महत्वपूर्ण सड़क को भी नई पहचान मिले, ताकि आमजन को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
क्योकि किसानों का धान इसी मार्ग से धान संग्रहण केंद्र जाता है, फिर वहाँ से अलग अलग राईस मिल यह धान मिलर्स के पास पहुँचाया जाता है ।

क्षेत्र में बन रहा कई सड़क, कई सड़क का कार्य प्रस्तावित

राजिम विधायक की कार्यशैली से जनता तो ख़ुश हैं, राजिम विधानसभा क्षेत्र में बहुत से सड़क बन रहे है, जिसकी कल्पना अन्य विधायकों ने नही किया वह कार्य सड़के अब बन रहा हैं, जिसके मद्देनजर ग्राम सिर्रीखुर्द, खुटेरी, बिजली, मड़वाडीह के ग्रामीणों ने माँग किया है, कि विधायक जी इस रोड़ का भी उद्धार कर दो ताकि ट्रकों के आवागमन से ग्रामीणों का नुकसान व दुर्घटना न हो क्योकि रोड़ हर किसी के काम आना है, रोड़ में हर जात, हर धर्म के लोग गुज़रते हैं, विधायक जी अन्य रोड़ को सवार रहे हैं तो ये रोड़ क्यो बाक़ी रहे ।

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