स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस खतरनाक पेड़ को हटाने के लिए कई बार नगर पालिका और संबंधित विभाग को शिकायत की जा चुकी है। सुशासन तिहार के दौरान भी लिखित आवेदन देकर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
यह मार्ग रामजानकी मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं, स्कूली बच्चों और आम नागरिकों का प्रमुख रास्ता है। ऐसे में हर दिन सैकड़ों लोग इस खतरे के बीच आवाजाही करने को मजबूर हैं। वार्डवासियों का आरोप है कि संबंधित विभाग बार-बार शिकायतों के बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
हाल ही हुई घटना के बाद भी नहीं जागा प्रशासन
स्थानीय लोगों ने हाल ही में गरियाबंद की फॉरेस्ट कॉलोनी में हुई उस घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें नीलगिरी का एक विशाल पेड़ गिरने से एक महिला गंभीर रूप से घायल हुई थी। बाद में उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद जिला प्रशासन और वन विभाग ने संवेदनशील स्थानों पर खड़े खतरनाक पेड़ों को हटाने की दिशा में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई।
वार्डवासियों ने मांग की है कि नगर क्षेत्र में मौजूद सभी जर्जर और खतरनाक पेड़ों का तत्काल सर्वे कराया जाए, बिजली की तारों से सटे पेड़ों की नियमित छंटाई कराई जाए तथा दुर्घटना की आशंका वाले पेड़ों को प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो जनहित में आंदोलन करने पर मजबूर होंगे.
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