नशा मुक्ति केंद्र में फांसी की कोशिश, मचा हड़कंप – गंभीर हालत में रायपुर रेफर

(Mr ds news) गरियाबंद:_ नगर के वार्ड क्रमांक 8 स्थित नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में बीती रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब नशे की लत से जूझ रहे एक व्यक्ति ने शौचालय के भीतर गमछे के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। समय रहते लोगों की नजर पड़ने से उसकी जान बचा ली गई। गंभीर हालत में प्राथमिक उपचार के बाद उसे रायपुर रेफर किया गया है।

जानकारी के अनुसार, धमतरी निवासी लोकेश साहू को उसके परिजनों ने शराब की लत छुड़ाने के उद्देश्य से गरियाबंद स्थित नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया था। बीती रात करीब 9 बजे लोकेश शौचालय जाने की बात कहकर अंदर गया। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर केंद्र में मौजूद लोगों को संदेह हुआ। दरवाजा खोलकर देखा गया तो लोकेश गमछे के सहारे फांसी के फंदे पर झूल रहा था।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौजूद लोगों ने तत्काल शौचालय का दरवाजा तोड़ा और उसे नीचे उतारा। गमछा काटकर अलग करने के बाद तत्काल 112 पर सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही 112 के आरक्षक क्रमांक 515 कृष्ण कुमार राय और चालक भानु प्रताप ठाकुर तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने बिना देरी किए घायल व्यक्ति को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय पहुंचाया। चिकित्सकों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए बेहतर उपचार के लिए रायपुर रेफर कर दिया।

112 टीम की तत्परता की हो रही सराहना

घटना में 112 की टीम की तत्परता भी उल्लेखनीय रही। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और गंभीर अवस्था में व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। स्थानीय स्तर पर आरक्षक कृष्ण कुमार राय और चालक भानु प्रताप ठाकुर की तत्परता की सराहना की जा रही हैं।

इसी तरह एक अन्य मामले में धर्मेंद्र बजारे ने भी आत्महत्या की नीयत से जहरीला पदार्थ सेवन करने वाली एक महिला को समय रहते अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

समाज कल्याण विभाग से सहायता प्राप्त संस्था में चल रहा केंद्र

गौरतलब है कि गरियाबंद नगर के वार्ड क्रमांक 8 में समाज कल्याण विभाग से सहायता प्राप्त एनजीओ 'शांति मैत्री ग्रामीण विकास संस्थान' द्वारा नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र संचालित किया जा रहा है। यहां शराब, तंबाकू और धूम्रपान जैसी नशे की आदतों से जूझ रहे लोगों को उपचार एवं नशामुक्ति के उद्देश्य से रखा जाता है।

इस घटना ने नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती लोगों की मानसिक स्थिति, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि समय रहते जानकारी मिलने और तत्काल मदद पहुंचने से एक बड़ी अनहोनी टल गई।

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