श्रीराम कथा और रामचरितमानस के ज्ञान से रूबरू हुए विद्यार्थी
चार दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों, कांडों और चौपाइयों का अध्ययन कराया गया। आचार्य चिंता राम सेन, प्रेम लाल साहू, डॉ. लोकेश साहू एवं राम दयाल साहू ने विद्यार्थियों को श्रीराम के जीवन चरित्र, आदर्श, मर्यादा, सत्य, त्याग, सेवा और कर्तव्य जैसे मूल्यों की विस्तार से जानकारी दी।
रामचरितमानस सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं, जीवन का मार्गदर्शक
प्रशिक्षण के दौरान आचार्यों ने बताया कि रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने वाला महत्वपूर्ण ज्ञान-स्रोत भी है। भगवान श्रीराम के जीवन से सत्य, अनुशासन, मर्यादा और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।विद्यार्थियों को चौपाइयों का भावार्थ समझाने के साथ उनके व्यवहारिक जीवन में महत्व को भी बताया गया। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के विद्यार्थियों का दिखा संगम
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के अलग-अलग जिलों से विद्यार्थियों की सहभागिता रही। विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्यार्थियों के एक साथ प्रशिक्षण लेने से कार्यक्रम में सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी संवाद का माहौल बना।
विद्यार्थियों को मानस गायन, कथा वाचन तथा रामचरितमानस के अध्ययन के प्रति भी प्रेरित किया गया।
नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ना जरूरी
आचार्यों ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, संस्कार और महापुरुषों के आदर्शों से जोड़ना बेहद जरूरी है। श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, अनुशासन और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि रामचरितमानस में वर्णित आदर्शों को जीवन में आत्मसात कर समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण किया जा सकता है।
विद्यार्थियों ने पूरे मनोयोग से लिया प्रशिक्षण
मानस प्रशिक्षण बागबाहरा समूह खिसोरा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पूरे मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त किया। आयोजकों ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों में मानस के प्रति रुचि बढ़ाने और नई पीढ़ी को धार्मिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास लगातार किया जा रहा है।
कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों को प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को अपने जीवन में उतारने तथा रामचरितमानस के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।
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